प्रेगनेंसी में पीठ के बल सोने से क्या होता है?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:26

आपने भी देखा होगा कि प्रेगनेंट महिलाओं को पीठ के बल सोने से मना किया जाता है। अब भी एक स्टडी में इसकी पुष्टि भी की गयी है। जी हां, हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, पीठ के बल सीधे लेटने से बचना चाहिए क्योंकि यह मां और भ्रूण के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। गर्भावस्था में बहुत देर तक पीठ के बल सोना मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। विभिन्न स्टडीज़ में यह पाया गया है कि ज्यादातर गर्भवती महिलाएं लगभग 25 प्रतिशत समय पीठ के बल सोती हैं। इसकी वजह से जन्म के समय बच्चे का वजन कम हो सकता है और मरे हुए बच्चे के जन्म का भी खतरा इससे बढ़ जाता है। इसके अलावा पीठ के बल सोने से बच्चे को सही मात्रा में ऑक्सिजन नहीं मिलता और हो सकता है कि उसे सांस लेने में तकलीफ भी हो।
जब गर्भवती महिला पीठ के बल लेटती है तो गर्भाशय का पूरा भार शरीर के दूसरे अंगों पर पड़ता है. इससे ब्लड सर्कुलेशन भी बिगड़ सकता है. इसके साथ ही जब कोई गर्भवती ज्यादा समय के लिए पीठ के बल सोती है तो दिल और फेफड़ों पर भी इसका असर पड़ता है. जिससे इन जरूरी अंगों पर दबाव बढ़ जाता है.
अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान पीठ के बल सोने के नुकसान और फायदों के बारे में पता लगाने की जब कोशिश की गयी तो देखा गया कि जिन मांओं ने पीठ के बल सोने का समय कम किया उनके अपने स्वास्थ और भ्रूण के स्वास्थ में मानकों के आधार पर सुधार देखा गया। इसी तरह बच्चे को ऑक्सिजन ना मिलने की वजह से होनेवाली परेशानियां और उनके हृदय की गति बढ़ने जैसी स्थितियां भी कम देखी गयीं। सीधे शब्दों में कहा जाए कि जो माएं सोते समय अपने शरीर की मुद्रा को लेकर सचेत थीं, उन्हें बेहतर नींद भी आयी और उनके भ्रूण की सेहत में भी सुधार देखा गया।

साउथ ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर जेन वारलैंड ने कहा, "हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि महिलाएं अपनी सोने की स्थिति सही रखने के लिए अपने कमर के चारों ओर किसी डिवाइस का इस्तेमाल कर या उन्हें पहनने आराम से सो सकती हैं। इस तरीके से वो पीठ के बल सोने से खुद को रोक सकती है। इसी तरह गर्भवती मां को पोजिशनल थेरेपी की भी मदद ले सकती है। इस तरीके से वो खुद को पीठ के बल सोने से रोक सकेगी ही साथ ही नींद की गुणवत्ता और नींद के समय की मां और भ्रूण के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जा सकता है।" वारलैंड ने अपनी रिपोर्ट में सलाह देते हुए कहा कि,"गर्भवती महिलाओं को इस तरह के उपकरण पहनना चाहिए जो उन्हें पीठ के बल ना सोने में मदद करें, जो आरामदायक हों और नींद की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करते हों। कुछ मामलों में यह बच्चे के जन्म से जुड़ी परेशानियों से बचने का एकमात्र तरीका भी साबित हो सकता है, खासकर अगर मां के लिए अन्य कारकों के कारण जोखिम में वृद्धि हो रही है।"

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